शर्मनाक.. यहाँ 1 साल के लिए किराए पर मिलती है बीवी, ऐसे किया जाता है सौदा

इसमें कोई शक नहीं कि आज जमाना काफी बदल चुका है, लेकिन फिर भी महिलाओ पर होने वाला शोषण आज भी थमने का नाम नहीं ले रहा. वही अगर महिलाओ के जीवन की बात करे तो आज कल महिलाओ की जिस्फरोशी का धंधा भी काफी फल फूल रहा है. जी हां ऐसे में जहा एक तरफ महिलाओ की सुरक्षा की बात की जाती है, वही दूसरी तरफ उन्हें हर साल देश भर में बेचा जाता है. वैसे आपने लड़कियों को बेचने और खरीदने के कई किस्से सुने होंगे. जहाँ महिलाओ को खरीद कर उन्हें इस धंधे में उतार दिया जाता है.



बरहलाल आपको जान कर हैरानी होगी कि अब केवल महिलाओ को खरीदा या बेचा ही नहीं जाता बल्कि उन्हें एक साल के लिए किराए पर अपनी बीवी भी बनाया जा सकता है. हालांकि ये खबर जानने के बाद आपको ताज्जुब हो रहा होगा, लेकिन ये सच है.

बता दे कि ये रिवाज मध्य प्रदेश में देखने को मिलता है. यूँ तो मध्य प्रदेश कहने के लिए एक बड़ा राज्य है, लेकिन यहाँ शिवपुरी नाम की एक जगह भी स्थित है. बता दे कि ये जगह धड़ीचा प्रथा के लिए काफी मशहूर है. जी हां यहाँ हर साल एक मंडी लगाई जाती है, जहाँ लड़कियों को एक तरफ खड़ा करके प्रथा के नाम पर उनका सौदा किया जाता है.



गौरतलब है कि महिलाओ की इस मंडी में पुरुष आते है और अपनी पसंद की लड़की को कीमत देकर ले जाते है. इसके इलावा आपकी जानकारी के लिए बता दे कि इस मंडी की कीमत पंद्रह हजार से शुरू होकर पच्चीस हजार तक पहुँच जाती है.

आपको जान कर बेहद अफ़सोस होगा कि इस प्रथा के अनुसार लड़की के घरवाले ही केवल एक साल के लिए किसी भी अनजान शख्स से उसकी शादी करवा देते है. इसके साथ ही अगर वो शख्स चाहे तो ज्यादा पैसे देकर उस लड़की को ज्यादा समय के लिए अपनी बीवी बना कर भी रख सकता है.



गौरतलब है, कि सौदा पक्का होने के बाद दस रूपये से लेकर सौ रूपये तक स्टाम्प पेपर पर लड़कियों को बेचने की लिखा पढ़ी का काम पूरा किया जाता है. बता दे कि ये प्रथा आज से नहीं बल्कि कई दशकों से चली आ रही है. हालांकि बहुत सी महिलाओ ने कई बार इस प्रथा को लेकर अपनी आवाज बुलंद करने की भी कोशिश की, लेकिन हर बार उनकी आवाज को दबा दिया गया. यही वजह है कि प्रथा के नाम पर बिकने वाली किसी भी महिला ने आज तक किसी के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं करवाई.

बरहलाल हम तो यही उम्मीद करते है कि ये प्रथा जल्द से जल्द खत्म हो जाए ताकि महिलाओ को सुकून से जीने का अधिकार मिल सके.

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